Thursday, February 29, 2024
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चतुर बेटी : कैनेडा की लोक-कथा

Chatur Beti : Lok-Katha (Canada)

(यूक्रेन की यह लोक कथा जो उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के कैनेडा देश में कही सुनी जाती है बहुत ही अक्लमन्दी की लोक कथा है।)

यह बहुत पुरानी बात है जब लौर्ड हुआ करते थे। उनके पास बहुत ताकत होती थी। वे ही जज होते थे और वे गरीबों को जो चाहते दे सकते थे।

एक बार ऐसा हुआ कि एक लौर्ड ने लोगों को तीन पहेलियाँ बूझने के लिये दीं — क्या चीज़ शरीर को सबसे ज़्यादा ताकत देने वाली है? क्या चीज़ सबसे ज़्यादा मीठी है? और क्या चीज़ सबसे ज़्यादा चंचल है?

उसी शहर में एक गरीब आदमी अपनी 18 साल की बेटी के साथ रहता था। जब बेटी ने ये पहेलियाँ अपने पिता से सुनी तो वह अपने पिता से बोली — “पिता जी, आप लौर्ड के पास जा कर ये पहेलियाँ बुझाइये न।”

वह आदमी बोला — “बेटी, वहाँ पर इतने बड़े बड़े अक्लमन्द और अमीर लोग उन पहेलियों को बूझने के लिये आये हुए हैं। मैं उन लोगों के बीच कैसे जा सकता हूँ? वहाँ लौर्ड के पास बहुत बड़े बड़े लोग आते हैं और लौर्ड उनसे पूछता है — “तुम यहाँ किसलिये आये हो?”

वे लोग जवाब देते हैं — “हम लोग आपकी पहेलियाँ बूझने के लिये आये हैं।”

लौर्ड कहता है — “ठीक है। अगर तुम मेरी पहेलियाँ बूझ दोगे तो तुम्हें सौ डकैट मिलेंगे और यदि नहीं बूझ पाये तो सौ कोड़े मिलेंगे।”

वे लोग सब अपनी अपनी समझ के अनुसार पहेलियाँ बूझते हैं परन्तु सब गलत बूझते हैं और बेचारे सब सौ–सौ कोड़े खा कर वापस चले जाते हैं।

अब बता बेटी, मेरी क्या हैसियत है जो मैं वहाँ जाऊँ? और यदि मैं वहाँ गया भी और मैंने भी वे पहेलियाँ गलत बूझी तो मुझे भी सौ कोड़े पड़ेंगे और वे सौ कोड़े खा कर मेरी तो जान ही निकल जायेगी। नहीं बेटी, मैं वहाँ नहीं जा सकता।”

बेटी बोली — “नहीं पिता जी, आप जाइये, मैं आपको इन पहेलियों के जवाब बताती हूँ।

शरीर को सबसे ज़्यादा ताकत देने वाली चीज़ है धरती। धरती जिससे हमारा खाना आता है। सबसे ज़्यादा मीठी चीज़ है नींद जिसके आगे कोई चीज़ प्यारी नहीं। और सबसे ज़्यादा चंचल हैं आँखें।”

पिता डरते डरते लौर्ड के पास पहुँचा। लौर्ड ने उससे भी पूछा — “तुम यहाँ किसलिये आये हो?”

वह आदमी थोड़ा झुक कर बोला — “सरकार, मैं आपकी पहेलियाँ बूझने आया हूँ।”

लौर्ड बोला — “शर्त तो तुमको मालूम है न?”

आदमी बोला — “जी सरकार।”

लौर्ड ने पूछा — “तो बताओ क्या चीज़ सबसे ज़्यादा मीठी है?”

आदमी थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोला — “सरकार नींद। क्योंकि जब किसी को नींद आती है तो वह सब कुछ भूल जाता है।”

लौर्ड फिर बोला — “अच्छा अब बताओ कि शरीर को सबसे ज़्यादा ताकत देने वाली चीज़ क्या है?”

आदमी फिर कुछ पल रुका और बोला — “सरकार धरती।

शरीर को सबसे ज़्यादा ताकत देने वाली चीज़ है धरती क्योंकि वही हम सबको खाना देती है।”

लौर्ड फिर बोला — “बहुत अच्छे। और अब आखिरी सवाल। क्या चीज़ सबसे ज़्यादा चंचल है?”

आदमी बोला — “सरकार सबसे ज़्यादा चंचल हैं आँखें। उन्हें बन्द कर लो तो वे कुछ नहीं देखती हैं और उन्हें खोल लो तो वे आसमान के तारे तक देख लेती हैं।”

लौर्ड बोला — “बहुत अच्छे। तुमने पहेलियाँ तो बूझ लीं हैं पर अब यह बताओ कि इन पहेलियों के जवाब तुमको किसने बताये? क्योंकि इन पहेलियों को तुम खुद तो बूझ नहीं सकते।”

आदमी थोड़ा सिर झुका कर बोला — “सरकार आप ठीक कहते हैं। ये पहेलियाँ मेरी बेटी ने बूझी हैं।”

लौर्ड बोला — “तुम्हारी बेटी तो बहुत होशियार लगती है। ऐसा करो, ये एक दर्जन अंडे ले जाओ और कल सुबह मुझे इनमें से निकले हुए चूज़े ला कर देना।”

आदमी ने सोचा मैंने पहेलियों के जवाब क्या बूझे यह तो एक और मुसीबत गले आ पड़ी। पर मरता क्या न करता उसने वे अंडे उठाये और अपनी बेटी की सलामती की प्रार्थना करते हुए वह घर वापस आ गया।

बेटी ने पिता को देखा तो सब काम छोड़ कर दौड़ी दौड़ी पिता के पास आयी। उसने देखा कि उसका पिता तो ठीक ठाक दिखायी दे रहा है इसका मतलब है कि कम से कम उसको सौ कोड़े नहीं पड़े। उसने सन्तोष की साँस ली।

वह बोली — “क्या हुआ पिता जी? आप तो ठीक ठाक लग रहे हैं इससे ऐसा लगता है आपको इनाम मिल गया है।”

पिता कुछ परेशान सा बोला — “बस बस रहने दे। लौर्ड ने डकैट तो दिये नहीं और ये अंडे मुझे थमा दिये हैं। उन्होंने कहा है कि इन अंडों से निकले हुए चूज़े उनको कल सुबह चाहिये। अब क्या होगा?”

और उसने लौर्ड के घर में हुआ सारा हाल अपनी बेटी को बता दिया।

सुन कर बेटी बोली — “पिता जी, आप इन चूज़ों की बिल्कुल भी चिन्ता न करें। आइये पहले खाना खा लीजिये बहुत भूख लगी है।”

जब तक उस लड़की का पिता तैयार हो कर खाना खाने आया तब तक उसने वे सब अंडे पका डाले। कुछ उसने खुद खाये और कुछ उसने अपने पिता को खिलाये।

खाना खा कर उसने पिता को बाजरे के कुछ भुट्टे दिये और बोली — “पिता जी, आप इन भुट्टों को अभी अभी लौर्ड के पास ले जाइये और कहिये कि वह इनमें से दाने निकाले। उन्हें बोये और सुबह तक मुझे उनके भुट्टों में से मुलायम दाने निकाल कर भेजे ताकि सुबह सुबह मैं उनको उन अंडों में से निकले हुए चूज़ों को खिला सकूँ जो उसने मुझे भिजवाये हैं।”

पिता बाजरे के वे भुट्टे ले कर लौर्ड के पास पहुँचा। लौर्ड उसे दोबारा आया देख आश्चर्य में पड़ गया।

उसने पूछा — “क्या हुआ चूज़े इतनी जल्दी निकल आये?”

आदमी लौर्ड को भुट्टे देता हुआ बोला — “सरकार, मेरी बेटी ने यह बाजरा भेजा है और कहा है कि आप इसमें से दाने निकाल कर बो दें और सुबह ताजा पैदा हुआ मुलायम बाजरा सुबह पैदा होने वाले चूज़ों के खाने के लिये तैयार रखें।”

लौर्ड बोला — “तुम्हारी बेटी तो बहुत ही होशियार है। ऐसा करो कि तुम उसको मेरे सामने लाओ और उससे कहना कि वह मेरे पास आये तो न तो वह बिल्कुल बिना कपड़ों के हो और न ही कोई कपड़ा पहने हो।

न वह किसी सवारी पर आये और न ही पैदल आये। न तो वह कोई भेंट ही लाये और न ही वह बिना भेंट के आये।”

पिता बेचारा फिर से चिन्ता करता हुआ घर वापस लौट गया। बेटी ने पिता को आते देखा तो सब काम छोड़ कर फिर पिता के पास भागी आयी और बोली — “क्या हुआ पिता जी? अब लौर्ड ने क्या कहा?”

पिता दुखी हो कर बोला — “बेटी, अब की बार तू लौर्ड के फन्दे में फँस गयी। इससे निकलना बहुत मुश्किल है।”

बेटी को भी थोड़ी चिन्ता हो गयी पर फिर भी वह हिम्मत से बोली — “हुआ क्या पिता जी, कुछ बताइये तो सही।”

पिता ने उसे सब बता दिया तो बेटी की साँस में साँस आयी और वह बोली — “बस पिता जी, इतनी सी बात। आप तो बेकार में ही चिन्ता कर रहे थे। आप बिल्कुल भी चिन्ता न करें मैं सब सँभाल लूँगी। आइये पहले खाना खा लें फिर सोचेंगे।”

खाना खा कर बेटी अपने पिता से बोली — “पिता जी, आप मुझे बाजार से दस गज मछली पकड़ने वाला जाल ला दें।”

पिता बाजार गया और उसने अपनी बेटी के लिये दस गज मछली पकड़ने वाला जाल ला कर दे दिया।

उस मछली पकड़ने वाले जाल से उसने अपने लिये एक पोशाक बनायी और उसको पहन लिया। इस तरह वह न तो बिना कपड़ों के थी और न ही उसने कोई कपड़ा पहन रखा था।

फिर उसने अपना बड़ा वाला कुत्ता लिया और उस पर बैठ गयी। इस तरह वह न तो किसी सवारी पर सवार थी और न ही पैदल चल रही थी क्योंकि उस पर बैठ कर चलने से उसके पैर केवल घिसट ही रहे थे।

फिर उसने दो चिड़ियाँ पकड़ीं और एक बिल्ली और अगले दिन लौर्ड के घर चल दी।

लौर्ड ने जब उसे आते देखा तो उस पर अपने कुत्ते छोड़ दिये। लड़की ने अपनी बिल्ली छोड़ दी तो लौर्ड के कुत्ते उसकी बिल्ली के पीछे दौड़ पडे, और वह लड़की लौर्ड के घर में घुसी।

लौर्ड के सामने पहुँच कर उसने कहा — “लौर्ड, ये रहीं आप की भेंटें, पकड़िये।” यह कह कर उसने अपने हाथों में पकड़ी दोनों चिड़ियाँ छोड़ दीं।

चिड़ियाँ फुर्र से उड़ गयीं और लौर्ड उनको देखता रह गया। इस तरह वह भेंट लायी भी थी पर लौर्ड उस भेंट को ले भी न सका।

लौर्ड ने देखा कि वह कपड़े पहने भी थी और नहीं भी पहने थी। इसके अलावा वह अपने कुत्ते पर सवार थी और उसके पैर घिसट रहे थे सो वह सवारी पर थी भी और नहीं भी थी।

लौर्ड यह सब देख कर बहुत खुश हुआ। वह बोला — “बैठो, तुम बहुत होशियार लड़की हो। क्या तुम मुझसे शादी करोगी?”

लड़की बोली — “यदि आप चाहें तो।”

लौर्ड फिर बोला — “ठीक है। अभी तुम अपने घर जाओ। मैं कल तुम्हारे पिता जी से बात करूँगा और फिर हम शादी कर लेंगे।”

लड़की अपने घर वापस आ गयी और अपने पिता से बोली — “पिता जी, लौर्ड मुझसे शादी करना चाहते हैं।”

अगले दिन लौर्ड उस आदमी के घर आया और फिर उन दोनों की शादी हो गयी।

अब सारे लोग अपनी सारी उलझनों को सुलझाने के लिये उस लड़की के पास आते थे चाहे लौर्ड घर में होता था या नहीं। और क्योंकि वह लड़की सारे फैसले अक्लमन्दी और समझदारी से करती थी इसलिये सारे लोग उसके फैसलों से बहुत सन्तुष्ट थे।

एक बार तीन लोग एक मेले में जा रहे थे। एक आदमी के पास एक घोड़ी थी, दूसरे आदमी के पास एक गाड़ी थी और तीसरे आदमी के पास एक जग था।

रास्ते में रात हुई तो वे तीनों लौर्ड के घर के पास रुक गये और वहीं सो गये। सुबह उठे तो देखा कि घोड़ी वाले की घोड़ी ने वहाँ एक बच्चा दे दिया था।

घोड़ी वाला आदमी बोला — “क्योंकि घोड़ी मेरी है इसलिये यह बच्चा भी मेरा है।”

गाड़ी वाला आदमी बोला — “तुम झूठ बोल रहे हो यह बच्चा मेरी गाड़ी ने दिया है इसलिये यह बच्चा मेरा है।” तीसरा आदमी बोला — “तुम दोनों झूठ बोल रहे हो। यह बच्चा मेरे जग ने दिया है इसलिये यह बच्चा मेरा है।”

तीनों फैसले के लिये लौर्ड के घर आये। लौर्ड घर में नहीं था तो लौर्ड की पत्नी बाहर आयी और उन लोगों से पूछा — “क्या बात है?”

तीनों ने अपनी उलझन बतायी तो वह बोली — “लौर्ड तो अभी घर में नहीं है बाहर अनाज से मछली पैदा करने गये हैं।”

यह सुन कर तीनों को बड़ा ताज्जुब हुआ। उनमें से एक बोला — “हमने मछली से तो मछली पैदा होती सुनी है पर अनाज से मछली पैदा होती तो कभी नहीं सुनी।”

लौर्ड की पत्नी बोली — “और मैंने भी कभी गाड़ी और जग से घोड़ा पैदा होता नहीं सुना। यह बच्चा घोड़ी वाले का है, उसको दे दो और अब तुम जाओ।”

जब लौर्ड लौट कर आया और उसने यह सब सुना तो अपनी पत्नी पर बहुत नाराज हुआ क्योंकि वह उससे कई बार कह चुका था कि वह उसके मामलों में दखल न दिया करे और आज उसने फिर फैसला कर दिया था।

वह फिर बोला — “तुम मेरी बात सुनती नहीं हो इसलिये तुम आज से मेरी पत्नी नहीं हो। जाओ निकल जाओ मेरे घर से।”

पत्नी बोली — “ठीक है मैं चली जाती हूँ पर आज आखिरी बार हम साथ साथ खाना तो खा लें।”

सो दोनों ने शाम को साथ साथ खाना खाया, शराब पी और फिर लौर्ड सोने चला गया।

इधर पत्नी ने गाड़ी वाले को बुला कर उसे गाड़ी तैयार करने के लिये बोला। गाड़ी तैयार होने पर उसने लौर्ड को गाड़ी में रखवाया और वह खुद भी उसके पास ही बैठ गयी और गाड़ी चल दी।

कुछ देर बाद लौर्ड की आँख खुली तो उसने देखा कि वह गाड़ी में है। वह बोला — “मैं कहाँ हूँ? और कहाँ जा रहा हूँ मैं?”

पत्नी ने जवाब दिया — “आप मेरे साथ हैं और आप मेरे साथ मेरे घर जा रहे हैं। आपने मुझे घर से बाहर निकाल दिया था न।”

लौर्ड बोला — “पर मैंने तो तुमको अकेले को ही घर से निकाला था फिर मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ?”

पत्नी बोली — “पर आपने ही तो कहा था कि मैं अपनी पसन्द की कोई एक चीज़ अपने साथ ले जा सकती हूँ। और क्योंकि आप मेरे पति हैं और क्योंकि आप मुझे सबसे ज़्यादा प्यारे हैं इसलिये मैं आपको अपने साथ लिये जा रही हूँ।”

लौर्ड ने अपना सिर पीट लिया। वह बोला — “चलो चलो घर वापस चलो। अब हम लोग साथ ही रहेंगे।”

और वे दोनों घर लौट आये और साथ साथ हँसी खुशी रहने लगे। अब लौर्ड कभी उसके मामले में दखल नहीं देता था।

(अनुवाद : सुषमा गुप्ता)

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